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Shraddha Paksha 2018 : Pitru Tarpan Vidhi Pitru Paksha 2018 | श्राद्ध पक्ष 2018: आप स्वयं भी दे सकते हैं पितृों को तर्पण, यह है विधि – Photo


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पितृों का तर्पण करने के लिए आप पुरोहित जी से अनुरोध कर सकते हैं। आप चाहें तो अपने पितृों का पूजन स्वयं भी कर सकते हैं। इसके लिए साफ-सुथरे स्थान पर कुश का आसन बिछाकर उस पर बैठें। कुश का आसन न मिले तो ऊन से बने हुए कपड़े का आसन बना सकते हैं। आपके पास एक लोटे में जल, तांबे की थाली या प्लेट, कच्चा दूध, फूल माला, कुश घास, अर्पित करने के लिए गुलाब के फूल, जनेऊ, जौ, सुपारी, कुछ सिक्के (पैसे), काले तिल, कच्चे चावल होने चाहिए।

ऐसे करें शुरुआत

 

बैठते समय कुशा का अगला भाग पूर्व दिशा की तरफ रखें। आसन पर बैठकर तीन बार आचमन (अरघा से लोटे से जल हथेली में ले और पी लें) करें। ओम केशवाय नम:, ओम माधवाय नम:, ओम गोविन्दाय नम: तीनों बार आचमन के साथ बोलें। आचमन के बाद हाथ धुलें और अपने ऊपर जल छिड़कें। बैठते समय अपना मुख पूर्व दिशा की तरफ रखें।

पितृों से करें अनुरोध

गायत्री मंत्र का जप करते हुए कुश घास की शिखा बनाए और इसे बांधकर अंगूठी बना लें। इस अंगूठी को अनामिका अंगुली में पहनकर अपने हाथ में जल, फूल, सुपारी और 1 सिक्का हथेली में लेकर संकल्प करें। संकल्प में अपना नाम, अपने पिता का नाम, गोत्र का नाम बोलें इसके बाद भगवान का नाम लें और अपने पितृों का स्मरण करते हुए उनसे तर्पण ग्रहण करने का अनुरोध करें।

देवताओं और ऋषियों का वंदन करें

अब तांबे की थाली में जल, कच्चा दूध, गुलाब का फूल डालें। हाथ में चावल लेकर देवताओं और सप्त ऋषियों का स्मरण वंदन करें। जनेऊ अपने सामने रख लें। सीधे हाथ की अंगुलियों के अगले भाग से तर्पण देना चाहिए। देवों को तर्पण के बाद इसी तरह ऋषियों को भी तर्पण दें।

अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से दें तर्पण

अब उत्तर दिशा में मुख करें। जनेऊ को माला बनाकर पहन लें और पालथी लगाकर बैठें। इस बार दोनों हथेलियों के बीच से जल अर्पित करते हुए देव शक्ति को तर्पण दें। इसके बाद दक्षिण दिशा में मुख कर लें। जनेऊ को क्रॉस बैग की तरह पहनें। अर्थात गले में डाले हुए जनेऊ का एक भाग उल्टे हाथ के कंधे पर रहने दें और दूसरी तरफ इसे सीधे हाथ के नीचे लें। अब तांबे की थाली में तिल अर्पित करें, फिर थोड़े तिल हाथ में लें और अपने पितृों का स्मरण करें, फिर इन तिलों को अंगूठे और तर्जनी के मध्य भाग से थाली में अर्पित कर दें।

ऐसे दें पितृों को तर्पण

 

अपने हाथों की अंजली बनाएं और अपने गोत्र का नाम लें पिता का नाम लें और उन्हें तीन बार जल अर्पित कर तर्पण दें। इसी तरह तीन बार दादाजी को, तीन बार दादाजी के पिताजी को तर्पण दें। फिर अपने दादाजी के गोत्र का नाम लें, अपनी दादी का नाम लें और उन्हें तर्पण दें। परदादी को तर्पण देते समय दादाजी के गोत्र का नाम लें, परदादी का नाम लें और तीन बार इसी तरह तर्पण दें। इसके बाद तीन बार अपने नानाजी को तर्पण दें। नानाजी के गोत्र का नाम लें, नानाजी का नाम लें और जल से तर्पण दें। फिर नानाजी के पिताजी को भी इसी प्रकार तर्पण दें। आप अपने स्वर्गवासी परिजनों को इसी प्रकार तर्पण दे सकते हैं।

ऐसा भी होता है

ऐसा अक्सर होता है जब अपने परदादा, परदादी या नानाजी के पापा और नानीजी के पापा का नाम नहीं पता होता। ऐसे में रूद्र, विष्णु और ब्रह्मदेव का नाम लेकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें। गोबर के उपले या कंडे पर गाय के घी और गुड़ की धूप करें और पांच भोग निकालें, ये पांच भोग पंचग्रास कहलाते हैं।

ऐसे निकालें पंचग्रास

केले के पत्ते पर देवताओं, गाय, कौओं, कुत्ते और बिल्ली के लिए भोजन निकालें। देवताओं का भोग मंदिर में दें या बहते जल में प्रवाहित कर दें। इसके बाद गाय को भोजन खिलाएं। कौओं और बिल्ली का भोजन छत पर रख दें या जहां इनके मिलने की संभावना हो, वहां पहुंचा दें। सभी को उनका भोजन देने के बाद विष्णु भगवान को प्रणाम करें और पितृों को प्रणाम कर आशीर्वाद लें।




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