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Navratra 2018 Nine Forms Of Devi Durga Shailputri Puja Vidhi : Navratra 2018 First Day Dedicated To Maa Shailputri | नवरात्र का पहला दिन, मां शैलपुत्री की पूजाविधि और महत्व जानें – Photo


मां दुर्गा के नौ स्‍वरूपों में सर्वप्रथम हिमालय की कन्या मां शैलुपुत्री की पूजा होती है। आज आश्विन शुक्ल प्रतिपदा है और आज देवी के इसी स्वरूप की पूजा हो रही है। इस दिन कलश स्‍थापना के साथ मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। पुराणों में कलश को भगवान गणेश का स्‍वरूप बताया गया है इसलिए कलश की स्‍थापना पहले ही दिन कर दी जाती है। इसके बाद अन्य देवी-देवताओं के साथ माता शैलपुत्री की पूजा होती है। आइए जानें माता शैलपुत्री की पूजा विधि और महत्व।

1/5हिमालय की पुत्री



मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनका वाहन वृषभ है इसलिए इनको वृषारूढ़ा और उमा के नाम के भी जाना जाता है। देवी सती ने जब पुनर्जन्म ग्रहण किया तो इसी रूप प्रकट हुईं इसीलिए देवी के पहले स्वरूप के तौर पर माता शैलपुत्री की पूजा होती है।

2/5सौभाग्‍य की प्रतीक हैं मां शैलपुत्री



मां शैलपुत्री की उत्‍पत्ति शैल से हुई है और मां ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और उनके बाएं हाथ में कमल शोभायमान है। उन्‍हें मात्रा के सती के रूप में भी पूजा जाता है।

3/5मैं शैलपुत्री पूजा विधि



मां को सफेद वस्‍तु अतिप्रिय हैं। मां को सफेद वस्‍त्र और सफेद फूल चढ़ाएं और सफेद बर्फी का भोग लगाएं। मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल और कन्‍याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

4/5मां शैलपुत्री का मंत्र



‘वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥’
मां की पूजा में सभी नदियों, तीर्थों और दिशाओं का आह्वान किया जाता है। नवरात्र के पहले दिन से आखिरी दिन तक घर में सुबह-शाम कपूर को जलाने से नकारात्‍मक ऊर्जा दूर होती है।

5/5स्थिरता की प्रतीक मां शैलपुत्री



मां के इस पहले स्‍वरूप को जीवन में स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। शैल का अर्थ होता है पत्‍थर और पत्‍थर को दृढ़ता की प्रतीक माना जाता है। महिलाओं को इनकी पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है।




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