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Happy Navratri 2018 Nine Forms Of Goddess : Navratri Wishes | Happy Navratri Wishes: देवी के इन नौ रूपों को समर्पित हैं नवरात्र, जानें हर स्वरूप का महत्व – Photo


नवरात्र संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें। सनातन धर्म को माननेवालों के लिए नवरात्र का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न शक्ति रूपों की पूजा की जाती है और रात में जागरण, डांडिया, गरबा इत्यादि के साथ त्योहार मनाया जाता है। हर साल नवरात्र का त्योहार 4 बार आता है। इनमें 2 बार गुप्त नवरात्र आते हैं, इन नवरात्रों का तंत्र साधना करनेवाले साधकों के लिए विशेष महत्व होता है। व्यापक स्तर पर मनाई जानेवाली नवरात्रि चैत्र और शारदीय नवरात्र हैं। इस बार शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से शुरू हुए हैं। आइए, जानते हैं कि इन नौ दिनों में किस दिन मां के कौन-से स्वरूप की पूजा की जाती है…

1/9पहला दिन समर्पित है मां शैलपुत्री को



शैलपुत्री का अर्थ होता है पहाड़ों की पुत्री। मां शैलपुत्री पर्वतों के राजा हिमालय की पुत्री हैं। नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। मां शैलपुत्री अखंड सौभाग्य देनेवाली माता हैं। कार्य सिद्धि और सफलता के लिए मां के इस स्वरूप का पूजन किया जाता है। भगवान की साधना में हमारा मन पर्वत की तरह अडिग रहे, इसी भाव के साथ नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं और यहीं से उनकी साधना शुरू होती है। यह है शैलपुत्री माता का ध्यान मंत्र…

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

2/9तप की सिद्धि के लिए दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा



ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाली। मां का यह तपस्वी स्वरूप है। ब्रह्म का अर्थ होता है तप और चारिणी का अर्थ होता है आचरण करनेवाली अर्थात तपमय जीवन जीनेवाली। व्रत-पूजन में आनेवाली किसी भी बाधा को पार करने की शक्ति प्राप्त करने के लिए नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र यह है…

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

3/9चांद की तरह चमकता मां चंद्रघंटा का स्वरूप



चंद्रघंटा का अर्थ होता है चांद की तरह चमकनेवाली। इस स्वरूप में मां के मस्तक में घंटे के आकार का चंद्र स्थापित होता है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनकी कृपा से बुरी शक्तियों का नाश होता है। मां का यह स्वरूप भक्तों के लिए शीतल तेज लिए हुए है तो बुरी शक्तियों के विनाश का प्रतीक है। मां अपने भक्तों को निर्भय होने का आशीर्वाद देती हैं ताकि उनके तप में किसी तरह का विघ्न न आ सके। मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र यह है…

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

4/9मां कूष्मांडा के चरणों में है पूरा संसार



कूष्मांडा का अर्थ होता है, जिसके चरणों में पूरा संसार है। मां कूष्मांडा को आदि शक्ति कहा जाता है। देवी दुर्गा के इसी स्वरूप को सृष्टि का निर्माण करनेवाला माना जाता है। नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इनकी कृपा से सभी प्रकार के रोग-शोक का नाश होता है और साधक सिद्धि प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। मां कूष्मांडा का ध्यान मंत्र यह है…

वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥

5/9संतान प्राप्ति और वंश को यश देती हैं स्कंदमाता



भगवान कार्तिकेय का नाम है स्कंद कुमार। इन्हीं की जननी को स्कंदमाता कहा जाता है। देवीभाग्वत् पुराण में बताया गया है कि नवरात्र के पांचवें दिन देवी के पांचवें स्वरूप स्‍कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। मां के इस स्वरूप की पूजा से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। वंश को यश की प्राप्ति होती है। मां के इस स्वरूप का ध्यान मंत्र यह है…

नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥

6/9अमोघ फल देती हैं मां कात्यायनी



नवारत्र के छठे दिन माता के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाती है। इन्होंने ऋषि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छापूर्ति के लिए उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया था। मां का यह स्वरूप अमोघ फल देनेवाला है, इसका अर्थ ऐसे फल से होता है, जिसका कभी नाश नही होता। मां के इस स्वरूप का साधना मंत्र इस प्रकार है…

कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते॥

7/9काल का नाश करनेवाली मां कालरात्रि



मां दुर्गा का कालरात्रि स्वरूप बुरी शक्तियों का नाश करनेवाला है। नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां का यह स्वरूप देखने में अत्यंत भयावह है, इनका वर्ण अंधकार के समान काला और केश बिखरे हुए हैं। इस स्वरूप में माता के तीन नेत्र होतें हैं, जिनसे निकलनेवाला तेज पापियों का संहार करता है। मां के इस स्वरूप की साधना का मंत्र यह है…

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

8/9आठवें दिन पूजी जाती हैं मां महागौरी



महागौरी का अर्थ है सुंदर आभामंडलवाला सर्वशक्तिशाली स्वरूप। मां के इस स्वरूप को अन्नपूर्णा, ऐश्वर्य प्रदाता, मानसिक शांति देनेवाला और सांसारिक ताप का हरण करनेवाला माना जाता है। मां दुर्गा के इस स्वरूप को आठवें दिन इसलिए पूजा जाता है क्योंकि जब मां अपने इस रूप में प्रकट हुईं तब उनकी आयु 8 वर्ष थी। मां महागौरी का ध्यान मंत्र यह है…

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

9/9सर्व सिद्धि देनेवाली मां हैं सिद्धिदात्री



मां शक्ति अपने सिद्धिदात्री स्वरूप में हर मनोकामना की पूर्ति करती हैं। मां सिद्धिदात्री शांत मुद्रा में रहते हुए अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां ने हजारों साल तक तपस्या की थी, जिसके कारण इनका रंग काला पड़ गया था। इसके बाद भगवान शिव की कृपा और गंगाजल में स्नान के बाद इन्होंने अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त किया। साधना पूर्ण होने पर मां अपने भक्तों की लौकिक और पारलौकिक हर तरह की इच्छाओं को पूर्ण करती हैं। मां के इस स्वरूप का ध्यान मंत्र इस प्रकार है…

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

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