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Navratra 2018, Durga Saptshati Path : Navratri 2018 Durga Saptshati Path Keep These Things In Mind | Navratri 2018: दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय रखें इन 9 बातों का ध्यान – Uncategorized


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दुर्गा सप्‍तशती का पाठ वैसे तो कई घरों में रोजाना किया जाता है। मगर नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करने से इसका महत्‍व और बढ़ जाता है। नवरात्र में दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करने से अन्‍न, धन, यश, कीर्ति और धन की प्राप्ति होती है। मगर दुर्गा मां की यह स्‍तुति करते वक्‍त कुछ बातों का ध्‍यान रखना बेहद जरूरी होती है। अगर आप भी कर रहे हैं यह पाठ तो ये बातें जरूर जान लें…

स्‍पष्‍ट होना चाहिए उच्‍चारण

दुर्गा सप्तशती पाठ में सस्वर और एक लय से पाठ करने का महत्व है। सप्तशती में बताया गया है कि पाठ इस तरह से करना चाहिए कि एक-एक शब्द का उच्चारण साफ हो और आप उसे सुन सकें। बहुत जोर से या धीमे पाठ ना करें।

शुद्धता है बहुत जरूरी

पाठ करते समय हाथों से पैर का स्पर्श नहीं करना चाहिए, अगर पैर को स्पर्श करते हैं तो हाथों को जल से धो लें।

ऐसे आसन का करें प्रयोग

पाठ करने के लिए कुश का आसन प्रयोग करना चाहिए अगर यह उपलब्ध नहीं हो तब ऊनी चादर या ऊनी कंबल का प्रयोग कर सकते हैं।

ऐसे वस्‍त्र करें धारण

पाठ करते समय बिना सिले हुए वस्त्रों को धारण करना चाहिए, पुरुष इसके लिए धोती और महिलाएं साड़ी पहन सकती हैं।

मन एकाग्रचित होना जरूरी

दुर्गा पाठ करते समय जम्हाई नहीं लेनी चाहिए। पाठ करते समय आलस भी नहीं करना चाहिए। मन को पूरी तरह देवी में केन्द्रित करने का प्रयास करना चाहिए।

इस प्रकार करना चाहिए पाठ

दुर्गा सप्तशती में तीन चरित्र यानी तीन खंड हैं प्रथम चरित्र, मध्य चरित्र, उत्तम चरित्र। प्रथम चरित्र में पहला अध्याय आता है। मध्यम चरित्र में दूसरे से चौथा अध्याय और उत्तम चरित्र में 5 से लेकर 13 अध्याय आता है। पाठ करने वाले को पाठ करते समय कम से कम किसी एक चरित्र का पूरा पाठ करना चाहिए। एक बार में तीनों चरित्र का पाठ उत्तम माना गया है।

ऐसा करने से मिलता है पूर्ण फल

सप्तशती के तीनों चरित्र का पाठ करने से पहले कवच, कीलक और अर्गलास्तोत्र, नवार्ण मंत्र, और देवी सूक्त का पाठ करना करना चाहिए। इससे पाठ का पूर्ण फल मिलता है।

कुंजिकास्तोत्र का पाठ

अगर संपूर्ण पाठ करने के लिए किसी दिन समय नहीं तो कुंजिकास्तोत्र का पाठ करके देवी से प्रार्थना करें कि वह आपकी पूजा स्वीकार करें।

देवी मां से क्षमा प्रार्थना

सप्तशती पाठ समाप्त करने के बाद अंत में क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए और देवी से पाठ के दौरान कोई कोई भूल हुई हो तो उसके लिए क्षमा मांग लेनी चाहिए।




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