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Navratra 2018 Know The Auspicious Days | ग्रह नक्षत्रों का सुंदर योग, आश्विन नवरात्र पर बने हैं कई शुभ संयोग – Others


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डॉ. प्रणव पण्ड्या, शांतिकुंज, हरिद्वार

शक्ति उपासना व शक्ति अर्जन का पर्व है नवरात्र। नवरात्र के नौ दिन वर्ष के सर्वाधिक पवित्र दिवस माने जाते हैं। इन नौ दिनों की रात्रि कुछ विशेष ऊर्जा प्रदायिनी होती हैं। इसलिए इन्हें नवरात्र कहा जाता है। वर्ष के इन दिनों का भारतीय धर्म एवं दर्शन में ऐतिहासिक महत्‍व है, क्योंकि इन्हीं दिनों में बहुत सारी दिव्य घटनाओं के घटित होने का आख्यान हमारे पौराणिक ग्रंथों में मिलता है।

स्वाति नक्षत्र से प्रारंभ हो रही है नवरात्र
कई दशकों के बाद इस वर्ष आश्विन नवरात्र में कई संयोग एक साथ बन रहे हैं। स्वाति नक्षत्र से प्रारंभ होने के कारण नवरात्र में साधना करने वाले साधकों का कल्याण ही कल्याण होने के संकेत हैं। सद्बुद्धि की देवी मां गायत्री की उपासना, साधना से साधक को लाभ ही लाभ होने वाला है। इन दिनों मनोयोगपूर्वक की साधना से अधिक फलदायी है।

साधना एक तपश्चर्या
नवरात्र साधना का महापर्व है। इन नौ दिनों में मनोयोगपूर्वक की साधना से सिद्धि की प्राप्ति होती है और साधना से शुद्धि भी मिलती है। साधना एक तपश्चर्या है, जिसके बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन सभी आयामों का लक्ष्य एक है-शुद्धि प्रदान करना, परिष्कृत करना। जिसने अपना जितना परिष्कार कर लिया, वह उतनी ही तीव्रता से सिद्धि की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो अशुद्धियां उसके जीवन के लिए विध्वंसक बन जाती हैं।

साधना से आत्म परिष्कार
साधना के क्षेत्र में साधक का प्रयास हमेशा आत्म परिष्कार के लिए होना चाहिए, क्योंकि जिन-जिन आयामों में साधक की शुद्धि होती जाती हैं, उन-उन आयामो की शक्तियां उसे स्वतः ही मिलती जाती हैं। अतः इन दिनों की जाने वाली दैनिक साधना के क्रम में सबसे पहले पवित्रीकरण और आचमन किया जाता है, ताकि हम मन, वाणी, अंतःकरण से पवित्र बनें, सद्पात्र बनें और शक्ति ऊर्जा को धारण करने के योग्य बन सकें।

आंतरिक विचार बाहर होता है परिलक्षित
हमारे अंदर जैसा विचार व भाव होगा, वैसा ही हमारे कार्यरूप में परिलक्षित होता है। आज सब जगह प्रदूषण अपने विभिन्न रूपों संव्याप्त है और इस प्रदूषण को दूर करने के विभिन्न उपाय भी किए जा रहे हैं, लेकिन जब तक मनुष्य अपने वैचारिक प्रदूषण को दूर करने के उपाय नहीं करता, तब तक बाहर का प्रदूषण दूर करने के सभी उपाय व्यर्थ होंगे, और इस वैचारिक प्रदूषण को दूर करने का उपाय है आत्म साधना और इस आत्म साधना को तीव्रगति देने वाला है- नवरात्र। इस वर्ष कई दशकों बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। जो साधक को विशेष पुण्य देने वाला है। इस बार शारदीय नवरात्र पूरे 9 दिन के हैं, जो सुख और समृद्धि का शुभ संकेत है।

कई योग एक साथ
इस बार शारदीय नवरात्र में ग्रहों की स्थिति भी बेहद शुभ है। शुक्र अपने घर में विराजमान है, जो ग्रहों की चाल के अनुसार अच्छी स्थिति मानी जाती है। इस बार नवरात्रि में राजयोग, द्विपुष्कर योग, अमृत योग के साथ सर्वार्थसिद्धि और सिद्धियोग का संयोग भी बन रहा है। इन खास संयोग में माता की उपासना, साधना, आराधना ज्यादा फलदायी रहेगी।




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