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Navratri Vrat Upasana 2018 Shantikunj Haridwar : Navratri Puja Sadhna Shantikunj Haridwar | नवरात्र में साधना का है विशेष महत्व, मिलता है यह लाभ – Others





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शांतिकुज/हरिद्वार,

भारतीय संस्कृति में गंगा तट में साधना का बड़ा महत्त्व है। इस बार नवरात्र में कई योग एक साथ बने हैं। ऐसे में तीर्थ नगरी हरिद्वार के गंगा तट में साधना कर साधक अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए हजारों की संख्या में पहुँचे हैं। हरिद्वार के विभिन्न आश्रमों, अखाड़ों में साधक अपने-अपने गुरुओं के दिशा-निर्देश में नवरात्र के प्रथम दिन घट स्थापना के साथ साधना में जुट गए हैं।

हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भी देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु गायत्री साधना के लिए पहुंचे हैं। पं. शिवप्रसाद मिश्र ने साधकों को नवरात्र अनुष्ठान के संकल्प के साथ साधना की पृष्ठभूमि से अवगत कराया। प्रथम दिन साधकों ने अपनी दिनचर्या की शुरुआत ध्यान-साधना और हवन से किया। इसके बाद साधना का क्रम आरंभ हुआ।

शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग में साधकों को संबोधित करते हुए डॉ ओपी शर्मा ने कहा कि नवरात्र साधना का महापर्व है। इन नौ दिनों में मनोयोगपूर्वक की गई साधना से सिद्धि की प्राप्ति होती है और साधना से शुद्धि भी मिलती है। साधना एक तपश्चर्या है, जिसके बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन सभी आयामों का लक्ष्य एक है-शुद्धि प्रदान करना, परिष्कृत करना। साधना के क्षेत्र में साधक का प्रयास हमेशा आत्मपरिष्कार के लिए होना चाहिए, क्योंकि जिन-जिन आयामों में साधक की शुद्धि होती जाती हैं, उन-उन आयामों की शक्तियां उसे स्वतः ही मिलती जाती हैं।

शांतिकुंज में नवरात्र अनुष्ठान में साधकों की दिनचर्या में त्रिकाल संध्या का विशेष क्रम जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत प्रातः, दोपहर व सायं को एक-एक घंटा समय निर्धारित किया गया है। जिसमें प्रायः सभी साधक सामूहिक रूप से साधना करेंगे। साथ ही सैकड़ों साधक गंगा तट में साधना कर रहे हैं।




















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