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Environmentalist and Ganga warrior GD Agrawal dies in hindi

गंगा मुद्दे पर लंबे समय से अनशन कर रहे पर्यावरणविद जी.डी. अग्रवाल का 11 अक्टूबर 2018 को निधन हो गया. जी.डी. अग्रवाल का निधन उस समय हुआ जब उन्हें हरिद्वार से दिल्ली लाया जा रहा था.

आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके जी.डी. अग्रवाल इंडियन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे. हालांकि अब वह संन्यासी का जीवन जी रहे थे. वे गंगा एक्ट की मांग को लेकर 111 दिन से अनशन पर बैठे थे. जी डी अग्रवाल उर्फ ज्ञानस्वरूप सानंद का 86 वर्ष की आयु में निधन हुआ.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने तीन बार केंद्रीय मंत्री उमा भारती को बतौर प्रतिनिध भेजकर अग्रवाल से अनशन खत्म करने का आग्रह किया था. उमा भारती मातृसदन आश्रम में उनसे मिली थीं. तमाम कोशिशो के बावजूद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने उपवास नहीं छोड़ा और गडकरी से फोन पर कहा था कि एक्ट लागू होने तक अनशन जारी रहेगा.

प्रोफेसर जी डी अग्रवाल के बारे में

•    प्रसिद्ध पर्यावरणविद जी डी अग्रवाल आईआईटी कानपुर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे.

•    उन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद शंकराचार्य स्वानमी स्विरूपानंद सरस्वसती के प्रतिनिधि स्वाउमी अविमुक्तेतश्वारानंद से संत की दीक्षा ली थी.

•    दीक्षा लेने के बाद उन्हें ज्ञानस्वरूप सानंद के नाम से जाना जाने लगा.

•    जी डी अग्रवाल ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि मरणोपरांत उनके शरीर को वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दे दिया जाए.

•    उनके अनशन के 19वें दिन पुलिस ने उन्हें अनशन की जगह से ज़बरदस्ती हटा दिया था.

•    वह गंगा प्रदूषण, उसमें होने वाले अवैध खनन जैसे मुद्दों पर अनशन कर रहे थे. फरवरी में उन्होंने पीएम मोदी को दो बार चिट्ठी लिखकर गंगा के लिए अलग से कानून बनाने की मांग की थी लेकिन प्रतिउत्तर नहीं मिला था.

 

पहले भी कर चुके थे अनशन

वह इससे पहले भी गंगा के लिए आमरण अनशन कर चुके थे. वर्ष 2012 में आमरण अनशन पर बैठे अग्रवाल ने सरकार की ओर से मांगें माने जाने का आश्वासन मिलने के बाद अनशन तोड़ दिया था. उस दौरान भी उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और इलाज के लिए उन्हें वाराणसी लाया गया था. प्रो. अग्रवाल व अन्‍य कार्यकर्ताओं की मांगों पर तत्‍कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने गंगा की सहायक नदी भागीरथी पर डैम बनाने के काम को रोकने का आदेश दिया था.

 

यह भी पढ़ें: भारत के पहले राष्ट्रीय पर्यावरण सर्वेक्षण की घोषणा की गई

 




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