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Why Did This Saint Say That Truth Can Not Be Told : Why Did This Saint Say That Truth Can Not Be Told | जानें, आखिर इस संत ने क्यों कहा- सत्य को कहा नहीं जा सकता – Moral Stories


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संकलन: बेला गर्ग
लाओत्से ने वृद्ध होने के बाद अज्ञात में प्रवेश करने का निर्णय लिया। जब इस बात की जानकारी वहां के सम्राट को हुई तो उन्होंने उनसे कहा कि आपने जो साधना की है और जो अनुभव प्राप्त किए हैं, उन अनुभवों को पहले हमें बताएं, फिर आप यहां से प्रस्थान करें। लाओत्से ने कहा कि मैंने जो कुछ भी पाया है और जो कुछ अनुभव प्राप्त किया है, उसे बताया नहीं जा सकता। सम्राट ने बहुत दबाव डाला, पर लाओत्से बता नहीं पाए।

सम्राट को पता लगा कि बिना कुछ कहे लाओत्से वहां से चले गए हैं तो उन्होंने अपने राज्य की सीमा चैकियों पर सूचित कर दिया कि लाओत्से अपने देश की सीमाओं से बाहर निकलने न पाएं। जहां भी वे मिलें, उन्हें पकड़ लें और उनसे उनके अनुभव लिखवाए जाएं। एक चौकी पर उन्हें पकड़ लिया गया। वहां नियुक्त राज्यकर्मी ने कहा कि अपने जीवन के अनुभवों को लिखे बिना आप नहीं जा सकते।

लाओत्से ने कहा कि यही सबसे बड़ी मुश्किल है। सत्य को कभी कहा नहीं जा सकता। जैसे ही सत्य को कहा जाएगा वह असत्य हो जाएगा। राज्यकर्मी ने कहा कि मैं कुछ नहीं जानता। यदि मैंने आपको यहां से जाने दिया तो मुझे मौत की सजा हो जाएगी। मुझे बचाने के लिए ही आप कुछ-न-कुछ लिख दीजिए। कहते हैं कि विवश होकर लाओत्से को लिखना पड़ा और उन्होंने जो कुछ लिखा, उसमें पहला वाक्य था- सत्य को कहा नहीं जा सकता।

लाओत्से जैसे अनेक मनीषी सत्य को पाने के लिए कठोर साधना करते हैं, जो उन्हें अनुभव होता है वह अलौकिक एवं दिव्य होता है। जब वे उसे व्यक्त करने में, कहने में असमर्थ होते हैं, तब भला हम जैसे लोग सत्य के संदर्भ में क्या कह सकेंगे? हां, सत्य की तलाश में जी सकते हैं, उसे जीवन का ध्येय बना सकते हैं।




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